जयपुर रियासत में संगीत की शाही महफिलों में चार चांद लगा देती थी गौहर खान*
*जयपुर रियासत में संगीत की शाही महफिलों में चार चांद लगा देती थी गौहर खान*
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जयपुर रियासत के गुणीजन खाने की गायिका और नृत्यांगना गौहर खान जोधपुर महाराजा के बुलावे पर 1944 में जोधपुर गई थी । वहां उसने संगीत महफिल में खूब वाही वाही पाई।।गणगौर पर गौहर को तार भेज कर जयपुर बुलाया गया! गौहर खान के बिना राज महलों में संगीत नृत्य की महफिल अधूरी सी रहती थी।
विवाह के मौके****ओहदेदारों और धनाढ्य वर्ग की हवेलियों में संगीत की मजलिस सजाने जाती थी**** उस जमाने में गौहर को बुलाना बड़ी बात समझी जाती थी । वह बैलों के सगड़ में बैठकर आती जाती थी।
जयपुर फाउंडेशन के अध्यक्ष सिया शरण लश्करी के पास मौजूद दस्तावेज के मुताबिक राजा व उसके भाइयों की बारात में भी को गोहर को ले जाया जाता था । इतिहासकार मोहनलाल गुप्ता ने लिखा है की गोहर पिशवाज, जैकेट और पाजामा भी पहनती थी ।।ऐसें वह सलमा सितारों की जड़ी टोपी भी पहनती थी ।अदब कायदे की भी खूब थे वही नजर से बचने के लिए गोहर ललाट पर काजल का चांदनुमा टीका भी लगाती थी। गौहर की हवेली रामगढ़ चौपड़ में थी। अब सारंगी और तबले पर ठुमरी के बोल है" तीखें है नयनवा के बांण जी ,धोखा न खा जाना , सुनाई नहीं देता । गौहर अपने बटुए से छलिया और इलायची निकालकर अदब से पेश करती थी । आज के फिल्मी गीतों की तरह गोहर की गजलों को लोग गुनगुनाते थे।
गौहर खान की हवेली होने से रामगंज चौपड़ चौपड़ के एक खंदें को गौहर का खंदा कहते हैं ।
प्रधानमंत्री मिर्ज़ा इस्माइल ने गोहर खान की हवेली को एक लाख चांदी के कलदार देकर खरीदा। और महिला चिकित्सालय खोल दिया था।
वर्तमान में वहां महिला चिकित्सालय ही है ऐसी थी गौहर खान जिसके बिना संगीत की शाही महफिलें अधूरी थी।।
रिपोर्टर ::::वॉइस ऑफ़ मीडिया::::राजस्थान शिंभू सिंह शेखावत

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