डॉ. नितिन मेनारिया की तृतीय कृति ‘‘एक सफर ऐसा भी’’ यात्रा वृतांत का लोकार्पण समारोह सम्पन्न

 डॉ. नितिन मेनारिया की तृतीय कृति ‘‘एक सफर ऐसा भी’’ यात्रा वृतांत का लोकार्पण समारोह सम्पन्न



दैनिक शुभ भास्कर राकेश जैन राजस्थान उदयपुर अखिल भारतीय साहित्य परिषद्, उदयपुर इकाई एवं बाल विनय मन्दिर उच्च माध्यमिक विद्यालय, उदयपुर के संयुक्त तत्त्वावधान में डॉ. नितिन मेनारिया की तृतीय कृति ‘‘एक सफर ऐसा भी’’ यात्रा वृतांत का लोकार्पण समारोह विद्यालय सभागार में शुक्रवार शाम आयोजित हुआ |


कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. मलय पानेरी अधिष्ठाता, श्रमजीवी महाविद्यालय, जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय, उदयपुर ने की | मुख्य अतिथि कर्नल प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत सा. कुलगुरु, जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय एवं अध्यक्ष, भूपाल नोबल्स संस्थान, उदयपुर रहे | विशिष्ट अतिथियों में प्रो. सरोज गर्ग अधिष्ठाता, शिक्षा विभाग, लोकमान्य तिलक शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, डबोक, श्री बसंत सिंह सोलंकी सचिव, राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर तथा श्रीमती आशा पाण्डेय ओझा ‘आशा’ अध्यक्ष, अखिल भारतीय साहित्य परिषद्, उदयपुर इकाई शामिल रहे। कार्यक्रम में सानिध्य बाल विनय मन्दिर के संस्थापक श्री शंकरलाल मेनारिया का रहा |


पुस्तक समीक्षा डॉ. बालगोपाल शर्मा अतिरिक्त मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, फलासिया, उदयपुर डॉ. निर्मला शर्मा (सहायक आचार्य, विद्या भवन गांधी शिक्षा अध्ययन संस्थान, उदयपुर) एवं श्री विजय मारू (विकास अधिकारी, जीवन बीमा निगम, उदयपुर) ने प्रस्तुत की | मंच संचालन श्रीमती दीपिका स्वर्णकार (वरिष्ठ अध्यापिका, सेंट मेरी कॉन्वेंट सी. सैकंडरी विद्यालय, तीतरडी एवं आकाशवाणी उदयपुर उद्घोषिका) ने किया |


समारोह का शुभारम्भ माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं वंदना से हुआ | अतिथियों का तिलक व उपरणा द्वारा स्वागत किया गया | परिषद् उदयपुर इकाई द्वारा लेखक डॉ. नितिन मेनारिया एवं डॉ. पुष्पा कलाल को पगड़ी व उपरणा से सम्मानित किया गया |


अपने उद्बोधन में डॉ. नितिन मेनारिया ने कहा कि जीवन का एक पड़ाव ऐसा आता है जब व्यक्ति हर घटना का विश्लेषण करता है और यात्रा भी पूर्व-तैयारी व उद्देश्यपूर्ण सोच के साथ करता है | यात्राएँ न केवल अनुभव कराती हैं बल्कि जीवन में सामंजस्य स्थापित करने का संदेश भी देती हैं | ‘‘एक सफर ऐसा भी’’ पाठकों को लेखक की अनुभूतियों से जोड़ने का प्रयास है |


मुख्य अतिथि कर्नल प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत सा. ने अपने संबोधन में कहा कि नवरात्रि के चौथे दिन, जो माँ कूष्मांडा को समर्पित है, सृजनात्मकता का यह अवसर विशेष महत्व रखता है | पूर्वकाल में यात्राओं का वर्णन पत्रों के माध्यम से होता था, आज वही परंपरा इस पुस्तक में साहित्यिक रूप में जीवित हुई है डॉ. निर्मला शर्मा ने अपनी समीक्षा में बताया कि पाँच यात्रा- वर्णनों में लेखक ने दिल्ली और ग्वालियर सहित विविध स्थलों का इतिहास व सौंदर्य सहजता से प्रस्तुत किया है | डॉ. बालगोपाल शर्मा ने कहा कि इस कृति से समाज को बहुत सीखने को मिलेगा तथा प्राकृतिक सौंदर्य का सुंदर चित्रण है | श्री विजय मारू ने उल्लेख किया कि कवि-मन वाले लेखक ने इस यात्रा वृतांत में संवेदनाओं को सहजता से पाठकों तक पहुँचाया है |

अपने उद्बोधन में श्री शंकरलाल मेनारिया ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया | प्रो. सरोज गर्ग ने पुस्तक में हिन्दी साहित्यिक अभिरुचि की स्पष्ट झलक बताई | श्री बसंत सिंह सोलंकी ने कहा कि यात्रा-वृतांत भी साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा है और यह कृति निश्चित ही पाठकों के बीच सफल सिद्ध होगी| श्रीमती आशा पाण्डेय ओझा ‘आशा’ ने कहा कि यात्रा हमें संस्कृति, धर्म और समाज से सहजता से जोड़ती है और सीखने के अवसर प्रदान करती है |

अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. मलय पानेरी ने कहा कि डॉ. नितिन की तीनों कृतियों के विमोचन में शामिल होने का सौभाग्य उन्हें मिला है | ‘‘एक सफर ऐसा भी’’ में रेल यात्रा का रोचक वर्णन और लेखक की सहजता स्पष्ट झलकती है | उन्होंने लेखक को साहित्यिक प्रगति की शुभकामनाएँ दीं |

समारोह का समापन कल्याण मंत्र के साथ हुआ | कार्यक्रम में विद्यालय परिवार, गणमान्य नागरिक, वरिष्ठ साहित्यकार, समाजजन, शिक्षकगण एवं परिजनों की गरिमामयी उपस्थिति रही |

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