वरिष्ठ सुरों की मंडली” की सुरमई दोपहर मैं प्रभुजन खूब थिरके
वरिष्ठ सुरों की मंडली” की सुरमई दोपहर मैं प्रभुजन खूब थिरके
दैनिक शुभ भास्कर राकेश जैन राजस्थान उदयपुर,
अपनाघर आश्रम, बेदला में निवासरत 43 प्रभुजनों के लिए “वरिष्ठ सुरों की मंडली” के 20 सदस्य रविवार, 16 नवम्बर को दोपहर 3 से 5 बजे तक एक “सुरमई दोपहर” का आयोजन किया |
संस्थापक मुकेश माधवानी ने बताया कि इस आयोजन के माध्यम से प्रभुजनों के दैनिक जीवन में संगीत के माध्यम से उत्साह और आनंद का संचार हुआ | विमल शर्मा की सरस्वती वंदना के शुरू हुए भजनो ने सभी प्रभु जनों को थिरकने पर मजबूर कर दिया | बृजलाल जी सोनी "मेवाड़" *रचा है सृष्टि को इस प्रभु ने* हेमा जोशी *टूट गई है माला मोती*राजकुमार बापना ओम नमः शिवाय* एच काज़ी चल अकेला चल अकेला विमल शर्मा इक प्यार का नगमाबनारायण जी सालवी., तुम आज मेरे संग हंसलो ललित कुमार जैन राधिका गोरी से वृंदा शर्मा *नन्द बाबा ने कमल जुनेजा जिंदगी एक किराये का घर है गोपाल जी गोठवाल तन मन धन सब है तेरा विष्णु वैष्णव राम जानकी बैठे हैं विजया आमेटा मनिहारी का भेष बनाया* सुनाया | तीन प्रभुजनों ने भजन सुनाये |
अपना घर अध्यक्ष गोपाल कनेरिया ने वरिष्ठ सुरों की मंडली के सदस्यों का स्वागत करते हुए अपना घर आश्रम का परिचय दिया | उन्हें अबतक 105 प्रभु जनों को अपने परिवार जनों ने पुनः मिलाने का सौभाग्य मिला | कार्यक्रम मैं विनोद जोशी, गोपाल कनेरिया, मंजू शर्मा, अशोक कोठारी, प्रकाश चंद्र जोशी, लक्ष्मी नारायण कुमावत, राजेश गर्ग, हेमेंद्र तलेसरा, सुनील चौहान, भूपेंद्र शर्मा, गोपी लाल डांगी, सुभाष मेहता, प्रवीण चपलोत, हेमेंद्र तलेसरा उपस्थित रहे |

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